मैं और मेरी आंटी और हमारा प्यार - Agents of Ishq

मैं और मेरी आंटी और हमारा प्यार

चित्रण – अंशुमान साथै द्वारा

जैसन डी कुन्हा ने GunmasterG9 को अपनी बात यूँ बताई ।  

 

मैं उसको कुकी बुलाता था।  वो बहुत ही सुन्दर थी।  मैं उसको बचपन से चाहता था , यह जानते हुए भी कि वो मेरे से 15 साल बड़ी है, और दूर की रिश्तेदारी में बुआ लगती है ।  वो पुणे में अपने पति और दो बच्चो के साथ रहती थी, और मैं मुंबई में।

हमारा मिलना या बातचीत करना  बहुत कम होता था , लेकिन फिर भी,  मेरा उसकी तरफ, ज़बरदस्त  खिंचाव

 था। उसके लिए मेरे मन में बहुत कामना थी।  मैं उसके साथ सोना चाहता था।  लेकिन 20 साल का होते होते कुकी को ले के मेरी भावनाएं बदलने लगी। अब  मैं उसको बेहतर जानना और समझना चाहता था। जैसे जैसे समय बीता , मेरा उसका एक गहरा सम्बन्ध बनता गया। लेकिन मुझे लगता था, उसके लिए तो मैं अभी भी बस एक बच्चा ही था।  

फिर अचानक सब कुछ बदल गया।  

मैं एक दिन ऐसे ही घर में आराम कर रहा था और अचानक से कुकी का फ़ोन आ गया।  वो बोली कि उसको बस किसी से बात करनी है। उसकी आवाज़ से लग रहा था, वो ठीक नहीं है और मुझे उसकी चिंता हो रही थी।  उसने मुझे विडिओ कॉल पे आने को कहा और मैंने तुरंत हाँ कर दी।  मैंने इस बात पे ध्यान ही नहीं दिया कि मैंने उस टाइम शर्ट नहीं पहन रखी थी।  उसको कॉल पे देख के तो मैं दंग ही रह गया।  उसकी आखें काली हो रखी थीं और पूरा चेहरा सूजा हुआ था।  उसने बताया उसका पति उसके साथ हिंसक है, और ऐसा शुरू से ही होता आया है । वो अक्सर शराब पी के, उसको मारता पीटता था और उसके साथ यौन हिंसा भी करता था।  मैंने उसे पुलिस के पास जाने की सलाह दी, लेकिन डर के मारे उसने ऐसा नहीं किया।  और फिर उसके माँ – बाप भी उसका साथ नहीं देते थे ।  वो बोलते थे कि उन्हें इस बात से कोई लेना देना नहीं, कि शादी के बाद उसका पति उसके साथ कैसा बर्ताव करता है। मैं उस वक़्त 23 साल का था और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ।  जब मैंने उसकी मदद करने की इच्छा जताई तो उसने कहा कि वो बस यह चाहती है, कि उसकी बात कोई सुन ले । तो उस दिन, एक घंटे तक मैंने उसकी ज़िन्दगी की सारी मुश्किलों के बारे में सुना। और अंत में उसने सुनने के लिए मेरा शुक्रिया अदा किया।

आप कह सकते हैं  कि वो कॉल तो बस हमारी  दोस्ती की शुरुआत थी।  हमने  न अपने इस रिश्ते को नाम देने की कोशिश की और न ही कभी इसके बारे में कभी बात की।  वो बस हमारी दोस्ती का एक नया पन्ना था , जिसमे ज़्यादा नज़दीकियां और गर्माहट थी।  मैं उस समय एक कॉल सेंटर में काम करता था और इस वजह से मैं अजीबो गरीब टाइम पे काम पे रहता था ,मेरा काम का समय फिक्स्ड न था।  

लेकिन हम रोज़ एक दूसरे  को टेक्स्ट करते । वो बहुत ही साधारण टेक्स्ट  होते थे, बस हमारे रोज़मर्रा के काम और दिनचर्या की बातें।  और जहां तक मुझे पता था , मैं बस उसके लिए एक कन्धा था, जिसपे वो जी भर के रो सके, तब जब वो कमज़ोर महसूस करती थी और उसके पास बात करने को कोई और नहीं होता था।  लेकिन मेरी तरफ से तो उसके लिए बहुत सारा आकर्षण था।  वो मेरे लिए एक परफेक्ट इंसान थी और मैं उसका साथ चाहता था।  

कुकी से मेरी जो बातचीत होती थी, वो मेरी उम्र की लड़कियों से बिलकुल अलग थी।  हम हर चीज़ के बारे में खुल के बातें कर लेते थे।  मुझे ऐसा लगता था कि मैं उसके सामने एक खुली किताब की तरह हो जाता था।  मैं उससे अपने अतीत और अपने परिवार के बारे में बात करता था , और वो सब कुछ कहता  जो मैंने कभी अपने करीबी दोस्तों से भी नहीं कहा।  मुझे उससे बात करते टाइम कभी भी, कुछ भी सोचना नहीं पड़ता था।  वो मुझे सलाह नहीं देती थी , बस सुनती थी।  उसकी ये बात तो मुझे बहुत गज़ब लगती थी।  

टेक्स्ट धीरे धीरे कॉल्स में बदलने लगे।  एक सुबह जब कुकी ने कॉल किया तो मैं बस सो के ही उठा था।  जब मैंने उसको कहा के मुझे वाशरूम जाना है, तो वो मुझे यह कह के चिढ़ाने लगी कि वेट ड्रीम्ज़ से  लिंग खड़ा हो के जगा है क्या।  मैं शर्म से एकदम लाल हो गया।  मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूं।  मैंने घबरा के फ़ोन काट दिया।  वो हर सुबह मुझे फ़ोन करती और इसी बात पे चिढ़ाती।  बाद में उसने मुझे कहा कि इसमें कोई शर्माने वाली बात नहीं है और हम इस बारे में बात कर सकते है।  एक दिन कॉल के दौरान उसने मुझसे मुझे मेरा लिंग दिखाने को कहा।  मैंने भी तुरंत अपना कैमरा उस तरफ कर के दिखा दिया।  उसका चेहरा लाल हो गया और मुँह खुला का खुला रह गया।  वो मेरा वीडियो पे फ़ोन सेक्स का पहला अनुभव था।  मुझे तो पता भी नहीं  क्या था।  उसने मुझे कैमरा पे हस्तमैथुन करने को कहा।  मुझे याद है मेरा फ़ोन कितना खराब हुआ करता था। उसमें  बस 2 मेगापिक्सेल का कैमरा था।  मैंने वही किया जो उसने कहा।  उसकी आँखे फटी की फटी रह गईं और चेहरा, पूरा लाल।   उस दौरान मैं बस यही सोचता रहा कि क्या यह कोई सपना है ? क्या मैं सच में जगा हुआ हूँ ? मैं बहुत शर्मा रहा था क्यूंकि मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।  मैं यह सोच सोच के उत्तेजित हो रहा था कि वो क्या सोच रही होगी।  मैं चाहता था कि वो कैमरा अपने चेहरे से और नीचे ले जाए।  क्या वो खुद को टच कर रही थी ? लेकिन मैं मन ही मन बहुत खुश भी था।  मैं धूम पिक्चर के उदय चोपड़ा जैसा महसूस कर रहा था।  याद है, कैसे वो हर लड़की को देख के,कार और दो बच्चे के बारे सोचने लग जाता था?  बस मेरे केस में चार बच्चे होंगे क्यूंकि उसके दो तो, पहले से ही थे।  हम सारा टाइम एक दूसरे को वीडियो कॉल करते थे और पूरा दिन एक साथ एक दूसरे को कैमरा पे देखते हुए बिताते थे।  

इस बीच, उसके पति के साथ उसका रिश्ता दिन ब दिन बिगड़ता ही चला गया।  और फिर एक दिन उसने कुकी को घर से बाहर निकाल दिया।  फिर वो अपने बच्चो के साथ मुंबई रहने आ गयी।  उसके माँ बाप साउथ मुंबई में रहते थे और मैं रहता था, उपनगर यानी  सबर्ब्स में , जो कि काफी दूर था।  लेकिन यह मेरी खुशकिस्मती थी कि मेरी दादी उसके माँ बाप के घर, हर संडे खाना भेजती थी।  मैं ख़ुशी ख़ुशी उनके घर खाना ले के जाने का काम अपने सर लेता था,  ताकि मुझे कुकी को देखने का मौका मिले।  मैंने उससे बांद्रा चर्च में हर बुधवार को होने वाले  एक फंक्शन को अटेंड करने को बोला, जिससे हम हफ्ते में दो बार मिल सकें।  

मैंने अपना 24वा  जन्मदिन, उसके साथ बिताने का फैसला किया । हम मिले ।  थोड़ी देर यहाँ वहां घूमने के बाद, हम एक क्लब गए, जहाँ हमने शराब पी और फिर डांस किया।  वो पहली बार था जब वो मेरे इतने पास थी।  मेरा हाथ उसकी कमर पे था।  उसकी खुशबू मुझे आज भी याद है।  हमने साथ में काफी मज़े किये।  घर आ के मैं सारा टाइम उसके ही बारे में सोचता रहा।  शायद शराब का नशा होगा, लेकिन उस रात मैंने अपना फ़ोन उठाया और उसे टेक्स्ट भेज डाला ‘ तुम मुझे बहुत पसंद हो ‘ l उसने पलट के भेजा ‘ मैं भी तुम्हारे बारे में कुछ ऐसा ही महसूस करती हूँ’ l मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।  मैं उस दिन बहुत खुश था । हम अक्सर मिलते।  वो मेरे ऑफिस आती और काम ख़त्म हो जाने के बाद हम घूमने जाते।  मेरे ऑफिस में मेरे साथ काम करने वाले लोग भी उससे कई बार मिले।  किसी ने उसकी उम्र को ले के कोई सवाल नहीं उठाया।  शायद इसलिए क्यूंकि वो इतनी बड़ी लगती भी नहीं थी।

एक बार हमने साथ भी कुछ ज़्यादा ही पी ली। उसने कहा बाइक पे वापिस जाने के बजाय कैब ज़्यादा सही रहेगा।  जब हम पिछली सीट पे बैठे तो मेरे कंधे पे अपना सर रख के उसने कहा कि उसको मेरा साथ बहुत ही अच्छा लगता है। और मेरा उसका ख्याल करना भी उसको पसंद है।  मैंने उसकी तरफ देखा और फिर हमने किस किया। हमारा पहला किस !   हम कैब में ही एक दूसरे को बड़ी जोश के साथ चूमने लगे।  हमारे घर तक के 45 मिनट ऐसे ही बीते- कभी होठ पे किस करना , कभी गले पे , कभी एक दूसरे को काटना , और मेरा उसकी  टी -शर्ट के अंदर हाथ डालना।  मैं ख़ुश और मदहोश था l

जब हम उसके घर पहुँचे, तो उसने छत पे चलने को कहा।  अफ़सोस मेरे पास उस रात कंडोम नहीं था , इसलिए हम सेक्स नहीं कर पाए।  उसको घर छोड़ने के बाद तो, सबसे पहला काम मैंने यह किया कि जा के कॉंडम के दस पैक ख़रीद लिए ।  

और आखिरकार जब हमने सेक्स किया, तो लगा मैं जैसे चाँद घूम आया ।  मैं हमेशा से उसके साथ सोना चाहता था और अब मैं बहुत बहुत बहुत खुश था।  वो एकदम शुरआत वाला प्यार का नशा था , जैसा हर कपल के साथ होता है।  

जब भी मैं और कुकी सेक्स करते तो उसमें बहुत सारा फोरप्ले ( सेक्स से पहले एक दूसरे को उत्तेजित करने वाले खेल,  जैसे  किस , छूना )  होता l काफी जोश  और मस्ती भरा अनुभव था। ऐसा मेरी उम्र की लड़कियों के साथ नहीं होता था।  मतलब फोरप्ले इतना गहरा नहीं होता था किसी और के साथl और बाकी लड़कियों को बाहर पब्लिक में छूने और किस करने में भी दिक्कत थी।  मुझे सेक्स से पहले फोरप्ले बहुत पसंद है क्यूंकि इससे दो लोगो के बीच जो तनाव बनता है, उससे सेक्स और मज़ेदार हो जाता है।  कुकी तो बहुत ही बिंदास थी।  हम एक दूसरे को बिस्तर पे खूब छेड़ते और खूब मज़े करते।  उसके साथ कुछ भी करने या न करने का कोई दवाब नहीं था ।  वो जानती थी, क्या करना है।  शुरुआत में वो मुझे बताती थी कि योनि के किस हिस्से को चाटना है, उसके स्तनों को कैसे छूना है , और जो भी उसे पसंद है।  उसने तो मुझसे कहीं ज़्यादा सेक्स किया है अपने जीवन में , इसलिए उसको सब कुछ साफ़ साफ़ पता था।  मुझे पता था मैं बिस्तर पे अच्छा खिलाड़ी रहूंगा, क्यूंकि उसने मुझे बताया था कि क्या क्या करना है, जिससे उसको मज़ा आये।  सेक्स के दौरान, वो मेरे साथ बहुत धीरज रखती थी, और यूँ, मैं बहतर हुआ ।  

ज़ाहिर सी बात थी यह सब छुप छुपा के ही चल रहा था।  मेरी माँ को शक था कि मैं किसी को डेट कर रहा हूँ।  वो मुझसे बार बार यह बात पूछती थी भी कि क्या मेरी लाइफ में कोई है।  मैं सीधा मना कर देता था और अपने काम पे लग जाता था।  लेकिन मेरी माँ तो एकदम CID की तरह है, तो मुझे काफी डर भी लगता था।  बहुत ज़्यादा डर।  लेकिन मेरे परिवार वाले कुकी को जानते थे और यह भी जानते थे कि हमारे आपस में काफी बनती है , तो किसी ने शक नहीं किया।  हम लोग अपने परिवार के सामने बिलकुल नार्मल रहते थे।  

सिर्फ मेरे दो करीबी दोस्तों को पता था क्या हो रहा था।  मैं उनको तब से जानता था जब से मैं 6 साल का था और उनको सब कुछ बताता था। उन्होंने पहले तो कुकी के साथ बात आगे न बढ़ाने की सलाह दी क्यूंकि बड़ा पेचीदा मामला था ।  लेकिन जब मैंने उनको बताया कि मैं कुकी को डेट कर रहा हूँ तो उन्होंने  मुझे कुछ भी ऐसा वैसा नहीं कहा।  हाँ यह सलाह ज़रूर दी, कि मैं उसके साथ कोई ज़्यादा उम्मीद न रखूँ, क्यूंकि चीज़े कभी भी ख़त्म हो सकती थीं ।  

कुकी से मिलने से पहले, मैं यह नहीं सोचता था कि कोई क्या सोच रहा है, मेरा जो मन में आता था झट से बोल देता था।  हो सकता है कभी कभी मैं किसी के साथ इस तरह  बहुत कठोर और बदतमीज़ी से भी पेश आया हूँ ।  लेकिन वो मुझे बैठा के, मेरे व्यवहार और शब्दों के बारे में सोचने पे मजबूर करती थी।  लोगो की तरफ़ मेरा व्यवाहर बदलने लगा और मैं उनके बारे में ज़्यादा सोचने लगा। अगर मुझे लोगों से इज़्ज़त चाहिए थी, तो मुझे भी बदले में, लोगों को इज़्ज़त देनी होगी।  व्यवाहर तो दो लोगो से बनता है।  यह चीज़ें तो पक्का मैंने उसी से सीखीं ।  

6 महीने तक मैं  कुकी के साथ अपनी दुनिया में मग्न था और फिर एक दिन मुझे पता चला कि उसका पति वापिस आ गया है।  वो कुकी और बच्चों को वापस चाहता था।  ऐसा बोला जा रहा था कि उसको अपनी गलती का एहसास हो गया था और वो सुधर गया था l सब बकवास।  मेरे लिए तो सब झूठ था।  मेरे ख्याल से कहीं न कहीं मैंने यह उम्मीद लगा ली थी कि वो तलाक ले लेगी।  लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। एक दिन उसने बताया कि वो अपने पति से मिलने जा रही है ।  वो उसे फिर से मौका देना चाहती थी।  मैंने उससे पूछा कि हमारा क्या होगा।  इस सावल से उसको कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने बोला, हाँ हम संपर्क में रहेंगे। मैंने उससे कहा ,अगर वो पुणे चली जायेगी तो मैं उससे मिलने इतनी दूर नहीं जा पाऊँगा ।  जवाब में उसने कहा कि हाँ चलो कभी कभी मिल लेंगे, क्या उम्मीद कर रहे थे।  वो आखिर एक शादीशुदा औरत है । मैं अंदर से बिलकुल टूट गया। बहुत ही ज़्यादा निराश हुआ।

उसके बाद मैं उससे एक आद बार मिला भी। वो  मुझे बोलती वो मुझे मिस करती है।  वो हमारी बातें मिस करती है।  इसका मतलब उसे कुछ तो फर्क पड़ा था।  कुछ तो था हमारे बीच ।

ऐसा बिलकुल नहीं था कि मुझे उस दौरान सच्चाई नहीं पता थी।  बेशक वो शादीशुदा थी, मेरी रिश्तेदार थी और हम ज़्यादा दिन तक साथ नहीं रह सकते थे।  यहाँ तक कि उसके बच्चे और मैं भी एक दूसरे को अच्छे से जानते थे।  लेकिन इन सब बातों का मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा क्यूंकि मैं बस उसका साथ चाहता था, चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही।  लेकिन चीज़ें एकाएक ख़त्म हो गयी, बस इसी बात का मुझे सबसे ज़्यादा दुःख था।  

ज़िन्दगी आगे बढ़ती चली गयी।  मैं अपने काम में व्यस्त हो गया और परिवार के फंक्शन में एकदम जाना ही छोड़ दिया।  बहुत दिनों तक न हम मिले न हमने कोई बात की।  लेकिन कुछ सालो बाद, मैं किसी समारोह में कुकी से फिर से मिला। जिसके साथ मैंने इतने ख़ास पल बिताये, उसको अपनी आँखों के सामने पा के दुःख हुआ।  मैं सोचने लगा कि मैंने आख़िर किस लिए इतना समय लगाया, इतने जतन किए ? क्या वो सब बकवास था ? मुझे याद है मैं बाहर सिगरेट पी रहा था और वो मेरे पास आ गयी।  उसने मुझसे सिगरेट मांगी और मैंने दे दी।  उसने मुझसे कहा कि हमारे बीच जो भी था बहुत खूबसूरत था।  उसने ऐसा कभी पहले मह्सूस नहीं किया था और वो उन पलों को हमेशा याद रखेगी।  उसका ऐसा कहना मुझे अच्छा लगा लेकिन मैं अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ चुका था। अब  मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता  था।  सच तो यह है कि अगर चीज़े अलग ढंग से खत्म होतीं,  तो हम अच्छे दोस्त होते और सोचते कि आगे क्या करना है।  

बहुत बाद में जा के मुझे पता चला कि कुकी अपने से कम उम्र लड़कों के साथ काफ़ी घूमने लगी है ।  और सुनने  में आया था कि ऐसा इसलिए था क्यूंकि उसको बहुत ज़्यादा सेक्स करना था क्यूंकि उसका पति न उसको प्यार दे पाता था न ही समय।  

पीछे मुड़ के देखता हूँ तो लगता है कुकी का साथ तो मेरे लिए एक सपने जैसा ही था। लेकिन मुझे कुकी की तरफ की कहानी का कुछ भी नहीं पता।  हो सकता है उसे बस सेक्स चाहिए था , रिलेशनशिप नहीं।  मैं सही हो सकता हूँ, या गलत भी , क्या पता ? 

लोगों  ने अपने मन में यह धारणा बना रखी है कि अपने से उम्र में बड़ी औरत को पटा के डेट करना बहुत आसान है।  मुझे लगता है यह बिलकुल भी सच नहीं है।  बड़ी उम्र की औरतें, छोटे लड़को को खूब अच्छे से जानती हैं और लड़को के बिना बोले ही समझ जाती हैं कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है।  लेकिन बात उम्र में बड़े होने की नहीं है।  मैं यह नहीं कह रहा कि अपने से बड़ी उम्र की औरत को डेट मत करो।  इसमें कोई बुराई नहीं l जब कोई आदमी अपने से छोटी उम्र की औरत को डेट करे या शादी करे , तो लोगों को कोई दिक्कत नहीं होती ।  मिलिंद सोमन और उसकी बीवी को ही देख लो।  लेकिन जब प्रियंका चोपड़ा ने निक जोनस से शादी की तो प्रियंका को लोगों  ने खूब उल्टा सीधा बोला।  मेरे लिए जो चीज़ मायने रखती है, वो यह है कि हम एक दूसरे को कितना समझते हैं।  उम्र तो बस दिमाग का फितूर है।  कोई ऐसी मिले जो उम्र में मुझसे बड़ी हो और बस हम एक दूसरे से मेल खाएँ ?  हाँ बिलकुल।  मैं तो ख़ुशी ख़ुशी उसे डेट करूंगा।  

लेकिन एक बात पे मैं अब अड़ा रहूंगा।  वो ये,  कि मैं किसी ऐसी औरत का तो कभी भी साथ नहीं चाहूंगा, जिसने अपना पिछला रिश्ता पूरी तरह से ख़त्म नहीं किया किया हो।  यहाँ तक की डेटिंग अप्प्स पे भी यह बात मैं पूछ लेता हूँ कि कहीं वो किसी के साथ तो नहीं है या अपना रिश्ता ख़तम करने के बीच में हैं ।  अगर कुछ ऐसा होता है तो मैं तुरंत पीछे हट जाता हूँ। मैं किसी भी तरह से  ऐसे लोगो के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता।  वो आराम से चीज़ें ख़त्म करें , मामला ठंडा करें और आगे बढ़ें ।  मैं इंतज़ार कर लूँगा। ऐसा करना ज़रूरी है क्यूंकि ब्रेकअप के तुरंत बाद ज़ख्म ताज़ा होता है।  मैं बस रोने के लिए कन्धा या चढ़ने के लिए लिंग नहीं बन सकता।  मुझे कैसुअल सेक्स में इतनी दिलचस्पी नहीं है।  मैं सिर्फ और सिर्फ ऐसे इंसान का साथ चाहता हूँ जो मेरे से उतनी ही शिद्दत से प्यार करे जितनी शिद्दत से मैं करता हूँ।  दोनों तरफ से फीलिंग्स होनी चाहिए।  

मेरी एक बार किसी औरत से ऑनलाइन बात हो रही थी।  मैंने उससे पूछा अगर हम रिलेशनशिप में जुड़ें, तो उसकी क्या उम्मीदें होंगी।  उसने कहा अभी तो कुछ नहीं, क्यूंकि अगर वो उम्मीदें लगा के बैठेगी और वो अगर पूरी नहीं हुईं तो उसको दुःख होगा। वो अपनी जगह सही भी है। लेकिन मुझे ऐसा लगता है, अगर आप अपनी उम्मीदों को खुल के लोगों के सामने लाते हैं, फिर साफ़ साफ़ कहते हैं कि आप क्या तलाश कर रहे हैं, तो इससे एक ठहराव आता है l  मुझे नहीं लगता मैं कुछ बहुत ज़्यादा मांग रहा हूँ।  हो सकता है कुछ गड़बड़ हो जाए।  अगला  अपना वादा तोड़ दे या धोखा दे दे या झूठ बोल दे। इंसान तो ऐसा करते ही हैं । लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उम्मीदें रखना ही छोड़ दें ।  जहा तक मेरी बात है , जिस जगह मैं कोई उम्मीद नहीं रख सकता, उस जगह मैं फिर कोई रिलेशनशिप भी नहीं देख सकता।

 

जैसन डी कुन्हा 28 साल के हैं, और प्यार को जानने और समझने का इंतज़ार कर रहे हैं , और अब भी अपनी मिस परफेक्ट को ढून्ढ रहे हैं ।  वो अक्सर शहर में प्रेमी जोड़ो को निहारते हुए मिलेंगे।  कुकी से आज भी उनकी दोस्ती है और वो आशा करते हैं कि कुकी कभी उनको बताएगी उसने जो किया क्यों किया।  

GunmasterG9  24 साल का लड़का है जो कि सारा टाइम कंफ्यूज रहता है लेकिन उतना ही महत्वकांशी भी है ।  उनको आर्ट और संगीत बहुत पसंद है और इस चेतन भगत से भरी दुनिया में वो पाब्लो नेरुदा बनने की चाह रखते है।  

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